वाशिंगटन । अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता और अधिनायकवाद के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने इस तर्क को खारिज किया कि तनाव को शांत कर लेना चाहिए और तेजी से आक्रामक हो रही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को स्वीकार कर लेना चाहिए। पोम्पिओ ने एक सवाल के जवाब में कहा, आज मेरा संदेश यह है कि हमें हमारे स्वतंत्र समाजों, हमारी समृद्धि और हमारे भविष्य को सुरक्षित रखने के हित में चीन की चुनौती के खिलाफ अंटलाटिक के दोनों तरफ जागरुकता को जारी रखने के लिए मिलकर काम करना होगा। 
इसी क्रम में, पोम्पिओ ने घोषणा की कि अमेरिका ने चीन पर अमेरिका-यूरोपीय संघ संवाद स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, पश्चिम में और हमारे साझा लोकतांत्रिक आदर्शों पर चीन के खतरे को लेकर हमारी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए इस नई व्यवस्था को लेकर मैं उत्साहित हूं। पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां संचालित कर रही है। उन्होंने कहा,इसमें दक्षिण चीन सागर में आक्रामकता बरकरार रखना, भारत के साथ हुआ घातक सीमा विवाद, अपारदर्शी परमाणु कार्यक्रम और शांतिपूर्ण पड़ोसियों के खिलाफ चेतावनी शामिल है। पोम्पिओ ने आरोप लगाया कि सीसीपी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), संयुक्त राष्ट्र और हांग कांग के लोगों के प्रति दर्शाई गई प्रतिबद्धताओं समेत कई अंतरराष्ट्रीय वादों को तोड़ा है।