एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद उनको प्रसन्न करने के लिए भोग लगाने का विधान है। धार्मिक शास्त्रों के पूजा के बाद भगवान को भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शास्त्रों में भगवान को भोग लगाने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से पूजा का पूरा लाभ प्राप्त होता है। आइए, आज जानते हैं भगवान को भोग लगाते समय किन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए।
 
भोग में तीखी चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए

इस कामदा एकादशी पर भगवान को भोग लगाते समय भोग में तीखी चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। भगवान को सादा भोग लगाने की पंरपरा है। भगवान विष्णु के भोग में मीठे पकवान रखना न भूलें।
 
विष्णु भगवान के भोग में तुलसी का उपयोग

विष्णु भगवान को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता जरूरी माना गया है क्योंकि कहते हैं कि भगवान तुलसी के बिना भोग ग्रहण नही करते हैं। विष्णु भगवान को तुलसी अतिप्रिय है।
 
भोग को तुंरत पूजा स्थल से नही उठाना चाहिए

भोग को लगाने के तुंरत बाद ही भोग को पूजा स्थल से नही उठाना चाहिए बल्कि भोग लगाने के बाद थोड़ी देर के लिए भगवान को प्रणाम कर वहां से हट जाना चाहिए, उसके बाद भोग को बांट देना चाहिए।
 
केवल सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं

भगवान के भोग में प्याज लहसुन का उपयोग नहीं करना चाहिए। प्याज लहसुन सात्विक आहार में नहीं आता है और भगवान को केवल सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।
 
भोग लगाने के बाद उसका थोड़ा सा हिस्सा निकालकर गाय को खिलाना चाहिए

भगवान को भोग लगाने के बाद उसका थोड़ा सा हिस्सा निकालकर गाय को खिलाना चाहिए उसके बाद ही स्वंय प्रसाद लेना चाहिए। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और ऐसा कहा जाता है कि गाय को भोजन खिलाने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।