कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों में तालमेल की भारी कमी दिखाई दे रही है। मजदूरों के पलायन की जब खबरें जोर पकड़ने लगी, तो केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मजदूरों के लिए रहने और खाने पीने का प्रबंध करें। इसके बाद यूपी और हरियाणा की बसें दिल्ली यूपी बॉर्डर पर पहुंच गई।

बसों में मजदूरों को जब ठूस-ठूस कर भरा जाने लगा, तो केंद्र सरकार को अहसास हुआ कि ये तो सोशल डिस्टेंसिंग का सरेआम उल्लंघन है। इसके बीच दोबारा से नया आदेश जारी किया गया। रविवार को जारी आदेशों में कहा गया कि अब कोई कहीं नहीं जाएगा। लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा।

गृह मंत्रालय  की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि अब बॉर्डर सील किए जाएं। मजदूर जहां पर भी हैं, उन्हें वहीं पर रहने दें। उसी जगह पर 14 दिन की क्वारंटीन सुविधा मुहैया कराएं। दूसरी ओर रविवार को भी यूपी और हरियाणा की सैंकड़ों बसें दिल्ली यूपी बॉर्डर पर देखी गईं।

इनमें बैठा कर लोगों को उनके निकटवर्ती स्थानों की ओर ले जाया जा रहा था। इस वजह से दिल्ली और दूसरे राज्यों का स्थानीय प्रशासन भी असमंजस में रहा।
 

बता दें कि देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में मजदूरों का पलायन जारी है। कई प्रवासी मजदूर अपने-अपने गांवों की ओर जा रहे हैं। जिनके पास साधन नहीं हैं, वे पैदल ही अपने गांव की ओर निकल पड़े।

यहां तक कि कई मजदूर सड़क हादसों का भी शिकार हो गए। दिल्ली सरकार की बसें उन्हें बॉर्डर तक ले गईं। उससे आगे यूपी सरकार ने अपनी बसें लगा रखी थीं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम कितना लागू हुआ होगा।

वहां जमा हजारों मजदूरों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जब उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हुई तो सरकार की नींद टूटी। केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, आनन-फानन में राज्य सरकारों से कहा गया कि वे इन मजदूरों को ले जाने के लिए बसों का इंतजाम करें।

यूपी और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने रातोंरात बसों का इंतजाम किया और अगली सुबह दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर बसों की कतार लग गई। वहां मौजूद लोगों की भीड़ बसों की ओर लपकी। हालांकि उस वक्त ऐसी खबरें भी मिलीं कि बसों में मनमर्जी का किराया लिया जा रहा है।
 

लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते देख शनिवार शाम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गृहमंत्रालय में एक बैठक बुलाई। इसमें तय किया गया कि जो भी मजदूर जहां पर है, उसे वहीं पर सुविधा प्रदान की जाए। अर्थात रहने और खाने पीने का इंतजाम हो।

इन आदेशों का भी कुछ ज्यादा असर नहीं हुआ। इसके अगले दिन आनंद विहार बस अड्डे पर लोगों की भारी भीड़ जमा थी। रविवार को मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस करते हुए कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने साफ तौर पर ये आदेश जारी किए कि अब किसी भी जगह पर लोगों की आवाजाही नहीं होगी।

यह लॉकडाउन का उल्लंघन है। सभी राज्य सरकारें इस बाबत सख्ती बरतें। किसी भी सूरत में लॉकडाउन का उल्लंघन न होने दें। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे 14 दिन के लिए क्वारंटीन केंद्र में भेज दिया जाए।

इन आदेशों के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने रविवार सुबह आदेश जारी कर दिए कि उत्तर प्रदेश जाने वाले प्रवासियों की आवाजाही को पूरी तरह से रोका जाए। इसके लिए अतिरिक्त बल की जरूरत हो तो उसका भी प्रयोग किया जाए।

पुलिस आयुक्त के आदेशों में लिखा था कि सभी एसएचओ और दूसरे अधिकारी पेट्रोलिंग कर यह घोषणा करें कि सभी मजदूरों को सरकार उनका पूरा वेतन देगी। उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है।