जयपुर । राज्य की 200 विधानसभा सीटों के लिए 2018 में हुए चुनाव में भाजपा को 71 सीटों पर समेटते हुए कांग्रेस ने सरकार बना ली थी जिसके मुखिया अशोक गहलोत अशोक है अब सत्ताधारी कांग्रेस को चार विधायकों के असमय निधन के कारण इन क्षेत्रों में उपचुनाव की चुनौती दे रहे है जिन विधायकों का निधन हुआ उनमें तीन सीटों पर कांग्रेस के विधायक थे और एक पर भारतीय जनता पार्टी की विधायक थी अक्टूबर में सहाड़ा से कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी, फिर नवंबर में सुजानगढ़ से कांग्रेस विधायक और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल और राजसमंद से भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी, वल्लभगढ़ से कांग्रेस विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत के निधन चार सीटों पर उपचुनाव होने है। ऐसे में विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या अब 107 से घटकर 104 रह गई है। विधानसभा में कांग्रेस के विधायक 104, भाजपा के 71,आरएलपी के 3, निर्दलीय 13, सीपीएम के 2, बीटीपी के 2 और आरएलडी का एक विधायक है। चार सीटों पर होने वाले उपचुनावों के नतीजे कांग्रेस के अंदरूनी सत्ता समीकरण भी तय करेंगे। अगर चार सीटों पर कांग्रेस जीतती है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मजबूत होकर उभरेंगे, अगर कांग्रेस हारी तो सरकार के कामकाज और सीएम गहलोत की सत्ता संचालन नीति और नियत पर सवाल उठेंगे भाजपा के लिए भी उपचुनाव का प्रदर्शन अहम होगा। भाजपा अगर उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो उसे सरकार को घेरने का मौका मिलेगा, साथ ही प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का सियासी कद बढ़ेगा। अगर बीजेपी हारती है तो अंदरूनी खेमेबंदी और खींचतान और बढ़ सकती है। मगर पिछले दो साल से सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए चार सीटों जीतने की चुनौती होगी हालांकि संख्या गणित के अनुसार गहलोत सरकार को चारो सीटने हारने के बावजूद भी कोई खतरा नहीं होगा मगर नैतिकता के आधार पर जो पार्टी सत्ता संचालन कर रही है जाहिर है कि उसकी जीत के चांस दो तिहाई होते है।